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मुक्तक


जो कुछ भी है सृजन धरा पर,बो प्रेम का जीवंत स्वरूप है।जिसमें प्रेम उपस्थित नहीं,बो जीवन का स्वरूप नहीं है।।

प्रेम है अगर जीवन में,

समर्पण ही उसका स्वरूप है।टूटना बिखरना प्रेम नहीं है,ये तो वासना का ही रूप है।।

— अभय दीक्षित
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