जब जीवन में तृष्णा न हो तो,
  जीवन संत सा हो जाता है,
अगर मन कुटिल कामी हो जाये,
मधुशाला भी धाम नज़र आता है।।

अगर नज़र राम की हो जाये ,
इंसान देवता बन जाता है,
अगर मन में रावण वसा हो तो,
देवता भी राक्षस नज़र आता है।।

अगर  प्रेम सम्पर्ण हो जाये,
   पूजा बन जाता है,
अगर प्रेम दाम हो जाये,
व्यापर नज़र आता है।।

मन में अगर श्रद्धा हो तो,
कंकर भी शंकर बन जाता है,
मन अगर पापी हो जाये,
ईश्वर भी नश्वर नज़र आता है।।

विचार यदि उत्तम हो जाये,
जीवन प्रकाशमय हो जाता है,
विचार यदि नीच हो तो,
जीवन में अंधकार ही नज़र आता है।।

प्रेम अगर अनन्त हो जाये तो,
रोम-रोम संत हो जाता है,
जीवन अगर  पूर्ण हो जाये तो,
सारा संसार अपना हो जाता है।।
~अभय दीक्षित