सूना है आँगन न है कोई दिल के गलियारों में,मन अकेला भटक रहा है जैसे चार दीवारों में।इश्क़ दवा है या इश्क़ खता है ये कैसे बतलाये,जब हमने तो पढ़ा है बस इसे चंद अखबारों में।
सूना है आँगन न है कोई दिल के गलियारों में,मन अकेला भटक रहा है जैसे चार दीवारों में।
इश्क़ दवा है या इश्क़ खता है ये कैसे बतलाये,जब हमने तो पढ़ा है बस इसे चंद अखबारों में।