जीना सिर्फ खुद के लिये ...

दुनिया जाये भाड़ में

हम तो बस अपने जुगाड़ में

हम दो हमारे  दो

 

तुम आत्मनिर्भर बनो

तुम जन्नत तलाशो

या जावो जहांन्नुम में

हम तो ठहरे जोगी रे ....

 

तुम जीवो , मरो

हमें क्या लेना देना हैं

पांच साल में सिर्फ

तुम्हे एक बार वोट देने आना  हैं

 

कम्बख्त साले सुधरते नहीं

मुंगेरी लाल के सपनो में जीते हैं

सत्तर साल में रोटी कपडा मकान मिला ?

फिर क्यों गाला फाड् फाड् चिल्लाते हो ?

 

जब तक दुनिया रहेगी दोस्तों

अमीरी - गरीबी झगड़ती रहेगी

खुद का भविष्य खुद ढूँढना होगा

अपने दम पर चलना होगा ...