अत्यंत ही पीड़ा भारी मोए,

का कहे ये श्याम दीवानी रे।

सांवला रंग तेरा ,

भक्त मैं भई बेगानी रे।

जप –जप जाऊं मोहन मोहन,

बैठी मैं दर्श दीवानी रे।

देख –देख कभी मुस्काऊँ मैं,

कभी आंख भरे ये मीरा दीवानी रे।

~आयुषी गुप्ता