अजंता की दीवारों ने चीख कर कहा

जमीं ने बिठा कर तो 

बादलो ने पुकारकर कहा

सूरज की पहली किरणों ने तो

ढलती शाम के पंक्षियों ने कहा

हरसिंगार के पुष्पो ने कहा तो

कोयल ने मीठी सुरमयी तान छेड़कर

 कहा , कहा कि उसे

" तुमसे महोब्बत है"

Aayu