*********मैं कवि हूँ **16 मात्रा***********
मेरा साम ही कल्याण है
मैं विरोधी नही प्रेरक हूँ।
मेरा दाम ही प्रोत्साहन है
में आकांक्षी नही संतुष्ट हूँ।
मेरा भेद ही सदभाव है
में उपेक्षा नही अपेक्षा हूँ।
मेरा ही दंड पश्चाताप है
मैं चंचल तो नही अटल हूँ।
मेरा "नाम" ही पूंजी है
मै विश्राम नही गति हूँ।
मे आक्रोश चन्द मात्र है
मै क्रोधित नही निर्वेद हूँ।
मेरा मन ही सर्व मान्य है
मैं चंचल नही अविचलित हूँ
मेरा कर्म ही उद्देश्य है
में लोभी नही परिश्रम हूँ।
मेरा पूण्य ही तो दान है
मै कृपण नही परिचारक हूँ।
मेरा प्रेम ही अभिमान है
मै ढोंगी नही रसज्ञ हूँ
मेरा अहिवात ही संसार है
में बाधा नही आरम्भ हूँ।
मेरा धर्म मानुज सेवा है
मै आंधियारा नही रवि हूँ
में स्वाभिमान से कहता हूँ
में काव्य सर्जक एक कवि हूँ


