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चाँद और में


ये चाँद बड़ा बातूनी है अक़्सर खिड़की पर आकर,चाँदनी रात के क़िस्से सुनाया करता हैऔर में अल्हड़ सी बातों में उसकेडूब जाया करती हुँ, जैसे क्षितिज मेंसागर के मध्य सूरज डूबा करता है

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