जहाँ प्रेम ओर दया क्षमा नीतियों का सागर बहता है
वहाँ स्वयं धरती से है अम्बर गौरव गाथा कहता है
जहाँ सभ्यता जन्मी है वेदों को दुनिया जानी है
भाषाओं की प्रथम जनक संस्कृत सबने पहचानी है
जहाँ धर्मो का उदय हुआ अम्बर ने भृकुटि तानी है
राम, बुद्ध, महावीर धरा तेजस्वी और बलिदानी है
जहाँ वसुधा के गर्भाशय में रत्नों का भंडार भरा है
गंगा ,यमुना , कावेरी के सीने में श्रृंगार भरा है
जहा कंठ में भारत माता की ही ग़ौरवता का गान है
सब मजहब मिलकर कहते है ये अपना हिंदुस्तान है


