
तू चल
में तेरे साथ चलूँगी
तू लड़खड़ायेगी, में संभाल लुँगी
तू कभी अकेली थी ही नहीं
इस वीराने सँसार में
तू ढूँढती रही साथ हरदम
इधर -उधर तीतर- बितर होकर
हरदम खोजती रही अपनापन
वो कन्धा जिसपर सर रख रो सके
वो आँखे जिनसे आँखे मिलाकर
दिल की बात कह सके
वो ठोकरे ,वो रिश्तों की जंजीरे
वो सच में थी नहीं ,तूने ही
भावनाओं से जकड़ रहा था
आज वक्त है
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