के प्रश्न है है कल्पना है धार जिंदगी
तुम नहीं हो मैं नहीं हूं है प्यार जिंदगी
के मतलब के वास्ते तो पूछा करते हैं लोग
है कुटिल सा छोटा सा विचार जिंदगी
कि जीवन में मलंग का तो श्रवण भी अनुकूल है
इस पावन धरा पर जिंदगी तो एक फूल है
के दौड़ते हैं माया के पीछे ही सब
तुमको क्या पता यह तो हाथ की ही धूल है
के प्रेम ही तो जीवन में बस सार्थक है
समस्या चलती रहती सारी आर्थिक है
खुश रहो बांट दो तुम तो सारी खुशियां
जीना और मरना तो वार्षिक है
के चलते चलते डूब जाए डूब के अमर है
ऐसे ही चलता-फिरता व्यापार जिंदगी
के प्रश्न है है कल्पना है धार जिंदगी
तुम नहीं हो मैं नहीं हूं है प्यार जिंदगी
के देख कर उड़ान सबकी सब सबसे जलते रहे
के जलते जलते मछलियों सा मांचलते रहे
स्वभाव हमारा अब क्या तोलोगे तुम
हम तो थे फकीर उठके चलते रहे
के चंदन सा बन गया तो मैं महकता रहा
की चिड़िया सा चू चू चू आ या तो चहकता रहा
और ऐसा भी क्या जीवन मनुष्य का है जो
कि कुछ भी हो बात बस बहकता रहा
गिरा फिर गिरीके संभलता रहा
खुद से खुद की गलतियों का है सुधार जिंदगी
के प्रश्न है है कल्पना है धार जिंदगी
तुम नहीं हो मैं नहीं हूं है प्यार जिंदगी


