बाजार की भींड़ में तुम्हे झट से येे पहचान गई, लगा जैसे धोखा कोई दिया था अब तक आंखों ने तुम्हे भूलने का बहाना लिए। ज्यादा वक्त भी कहाँ हुआ था तुम्हे भूले हुए कि तुम फिर नज़र आ गए मुस्कुराते हुए।