बारिश की वो पहली बूंद जब दूर अपने जहां से निकलकर अपने घर को त्यागकर प्रेमी की व्यथा को शांत करने अपनी गर्द में ढेर सारा प्रेम छिपा के लाती है तब होता है मिलन दो अलग जहानो का फलक का धरती से जो कभी मिल तो न सकी पर आँखों की गहराई से देखो वो न मिल के भी पूरी है पृथ्वी के अधूरेपन को अपने प्यार से पूरा करने आसमान से एक बूँद गिर ही जाती है न प्यार अधूरा रहा न ही मिलन अधूरा रहा धरती के आलिंगन ने बूँद को समेट ही लिया था


