रोज़ रोज़ हर रोज़ कुछ खो रही हू मै!

खुद में ही खुद से जुदा हो रही हू मै!


कुछ रहा नहीं पुराना बाकी,

सब नया देख रही हूँ मैं!

रोज़ रोज़ हर रोज़ खुद की ही राख बटोर रही हूँ मैं!!