खुदा के कहर से वो अन्जान रहा है
नन्ही जान की ले वो जान रहा है
दौर-ए-क़त्ल-ए-आम अभी तक थमा नहीं,
जंग का रोज़-ब-रोज़ कर वो ऐलान रहा है |
दहशतगर्द का लक़ब दे रहा बच्चों को,
शायद ! पढ़ नहीं वो क़ुरआन रहा है |
लानत है "आशिक" ऐसे हुक्मराँ पर !
अपने आपको कह वो मुसलमान रहा है |