ज़िन्दगी में नई खुशबू आ गयी

खुश हूँ ! जब से तू आ गयी


मुद्दतों से सियाह थी रातें मेरी,

छट गए अँधेरे, जब रु-ब-रु आ गयी ।


आशुफ़्ता रहता था अमराज़ों से !

राहतें अब मेरे चार-सू आ गयी


ना हुई "आशिक़" की इक्तिजा और कोई !

दिल में जब से तेरी जुस्तजू आ गयी ।


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आशुफ़्ता : बेचैन

चार-सू : चारों तरफ़

अमराज़ : बीमारी

इक्तिजा : ख़्वाहिश

जुस्तजू : चाह