तन्हाई की महफ़िल में कभी मुस्कुरा के देख
दिल से तू किसी दिल को दिल से लगा के देख
गर चैन ना मिले तुझे इश्क़ की राहों में,
तो महबूब को अपने गले से लगा के देख |
ये दावा है मेरा ज़िन्दगी बदल जायेगी तेरी,
आवारा हवाओं से खुद को बचा के देख |
मुफ़्लिसी में कितना दर्द है तुझको ज़रा खबर ?
महलों में रहने वाले तू सड़कों पे जा के देख |
इस पाक़ ज़मीं पर हो गर जन्नत की आरज़ू,
तो माँ के आँचल में दो पल बिता के देख |
“आशिक” अगर हो देखना मन्ज़र तबाही का,
राह-ए-इश्क़ मे खुद को आज़मा के देख |


