महफिल में रुसवाई से सरे-आम बच गये

देकर वो तो हमें इल्ज़ाम बच गये


हुई इक ख़ता हमसे, तो हुए गुनहगार !

वो तो करके क़त्ल-ए-आम बच गये |


जो आयी यूं शर्त तन्हा जीने की !

लेकर हम उनका नाम बच गये |


पा ना सके "आशिक़” हम इश्क़ में वफ़ा !

क़ल्ब के सारे इन्तक़ाम बच गये |