क़ल्ब की हसीन दौलत नहीं मिलती
हर किसी को मुहब्बत नहीं मिलती
मिट जाते हैं निशां तूफाँ के बाद !
साहिलों को हिफाज़त नहीं मिलती ।
क़ीमत अदा करनी होती है हर चीज़ की !
मुफ़्त में अब तो इशरत नहीं मिलती ।
लब थरथराते हैं लबों से मिलने को !
लबों से छूने की जब इजाज़त नहीं मिलती ।
है इश्क़ ये उम्र क़ैद के मानिंद !
लाख चाहो पर ज़मानत नहीं मिलती ।
क़द्र कर "आशिक़" जो तुझसे अत्फ़ करे !
महबूब की हर किसी को निस्बत नहीं मिलती ।
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क़ल्ब : दिल
इशरत : ख़ुशी
मानिंद : जैसा
अत्फ़ : प्यार
निस्बत : साथ


