काश तुम्हे फुरसत ना हो कभी, अपने खुशनुमा जहान से, सितारों से सजाओ रातें अपनी, ड्योढ़ी पर सूरज खड़ा ही रहे देने रोशनी तुम्हे, हाँ चाहते तो हम भी है तुम्हे, पर शायद इतना नही, कि जितना ज़ुरूरी हो तुम्हारे लिए, जिससे तुम फुरसत निकाल के कर पाओ दो बात साथ हमारे, पर काश फुर्सत तुम्हे इतनी तो हो, जब कभी हम दें आवाज़ तुम्हे, तोड़ के अहदे करम सभी, मुड़ के एक बार मुस्कुरा दो तुम देख के हमारी तरफ, निकाल के फुरसत, अपने खुशनुमा जहान से एक पल ।