अहसान न जता ऐ ज़िंदगी तेरी दी खुशी का
मैंने सितारे नोच कर रातें अपनी सजाई है,
गर है तू खुदा तो होगा किसी ओर के जहां का
मेरा तो मैं खुद खुदा हूँ, ये मेरी खुदाई है,
शिकस्त में तूने देखा नही मुझें नज़र भर के
अब जो जीता हूं तो तुझे भी मेरी याद आई हैं
कहाँ तक ढोने होंगें मुझे ये झूठे दोस्त झूठे रिश्ते
जिन्होंने हर जरूरत पर मेरी,मुझसे नज़रें चुराई है
भर गरीबी में भी शहंशाही छोड़ी नही हमनें
कितनी बार हमनें शाहों के ताज की कीमत लगाई है