पहले हम भी खुल के जिंदगी जिया करते थे
उन लम्हो को महसूस किया करते है
पता नही इतने बड़े कब हो गए
अब घर के बोझ में ही चूर हो गए
बाहर जाने से पहले घर आने का सोचते है
अब हम उस जिंदगी को बहुत कोसते है
काश हमारे भी दिन थोड़े खुशकिस्मत के होते
बचपन से ही किसी काम में मगरूर होते
सोचा न था जिंदगी ऐसे दिन भी जिंदगी में लाएगी
हमे आगे जीने के लिए इतनी मसक्कत कराएगी
अब तो दिल पर बस पत्थर रखकर जिंदगी जी रहे है
कुछ बाते एक कान ने निकाल कर दूसरे में नई भर रहे है
वो तो हमारे अच्छे कामो का नतीजा होगा सायद
जो आज भी कुछ हाथ से हाथ मिला कर चल रहे है