जिंदगी जीने का हक़ उसे भी था
खुल के घूमने का हक़ उसे भी था
कहने को तो आज़ादी मिले 70 साल हो गए है
लेकिन असल आजादी में फर्क अभी भी था
हिन्दू मुस्लिम में हम आज भी लड़ रहे है
हर मुद्दे को हम कुछ यूँ ही जोड़ रहे है
सामने कुछ और पीछे कुछ करने में हम भी कम न थे
वो बालात्कारी दरिंदे भी जल्लादों से कम नही थे
काश की वो दिन भी ज्यादा दूर नही होते
जब हमारे देश की महिलाएं भी आजादी से घूम लेती
निर्भया आसिफ उन्नाव जैसे शर्मनाक अपराध होते है
हम सिर्फ इंसाफ के लिए जंतर मंतर पर खड़े होते है
सख्त कानून की मांग को लेकर हमे पुरे देश में मोमबतियां भी जलाई
लेकिन नेताओं ने अपने फायदे के लिए उसकी धज्जियां भी उड़ाई
आज नही तो कल हमे फिर पछताना होगा फिर किसी और को इंसाफ दिलाने के किये सड़कों पर आना होगा