प्यार!

क्या है?

शक्ल सूरत, नैन नक्श प्यार है?

या ये ख़्याल, ये दकियानूसी से आज़ाद शख्सियत प्यार है?

रोज़ मिलने के बहाने ढूँढना प्यार है?

या मुलाकातें ना होने पर भी मौजूदगी दर्ज करा देना प्यार है?

बेवज़ह, बेशुमार, बेतहाशा बातें करना प्यार है?

या फिर ख़ामोशी के मकान में सहूलियत की खिड़की खुली रखना प्यार है?

घड़ी घड़ी इज़हार का फरमान लहराना प्यार है?

या बे अमानी का तकिया खिसका के उसके भरोसे की चादर ओढ़ना प्यार है?

वक़्त के हिसाब से होना प्यार है?

या वक़्त के साथ हिसाब मिटाना प्यार है?

रौशनी में खिलखिलाने की वजह देना प्यार है?

या डर, बैचेनी को जीना सिखाना प्यार है?

जज़्बातों के खुले आसमां में भी कैद रखना प्यार है?

या बंदिशों की चार दीवारी में भी ख़्वाबों को आजाद रखना प्यार है?

जो तुम्हें है वो प्यार है?

या जो मुझे है वो प्यार है?