उसने कहा, " बैठ जाओ, तुम किसी लायक नहीं हो।"मैं बैठ गयी। बात उसकी मान गयीअपनी क़ाबिलियत को, उसकी तराज़ू़ में माप गयीख़ुद से नावाक़िफ़…इस बात से ना-मालूमकि रेशे रूह के, रौशें बन रहे थेकि जिल्द से मेरी, फूल खिल रहे थे
उसने कहा, " बैठ जाओ, तुम किसी लायक नहीं हो।"
मैं बैठ गयी। बात उसकी मान गयीअपनी क़ाबिलियत को, उसकी तराज़ू़ में माप गयी
ख़ुद से नावाक़िफ़…इस बात से ना-मालूम
कि रेशे रूह के, रौशें बन रहे थेकि जिल्द से मेरी, फूल खिल रहे थे