घर की चौखट पर बैठते हैं और बातें करते हैं,

तुम्हारा इंतजार और मैं,


दोहराते हैं उन लम्हों को फिर से जब तुम थी, 

बातें दो चार और मैं....


तुम्हारे जाने के बाद शहर में दो ही बाकी रहे,

यादों की बयार और मैं....


वो दो ही थे जिन्हें फिक्र हमेशा तुम्हारी ही रही,

एक परवरदिगार और मैं...


तूफान के बाद अगर घर में कुछ सलामत है तो,

घर की दीवार और मैं...


कहानी खत्म हुई, फिर भी जो अनपढ़ा रह गया,

एक मेरा किरदार और मैं...