मैं जब पैदा हुई

तो बहूतों ने मारा ताना 

माँ की आँखों में आँसु 

उन्हें छुपाने का चाहिए था बहाना


मैंने माँ से गंभीरता से पूछा

क्या तेरे आँसु की मैं वजह 

माँ ने बाल सहलाकर कहा

पगली, ऐसा कह मुझे न दे सज़ा


माँ ने फिर कहा 

तू तो शिव की शक्ति 

तू ही तो है 

विष्णु में लक्ष्मी की भक्ति 


मैं तेरे साथ हमेशा 

तेरी हर उड़ान में

तू चमके वैसे ही 

जैसे चमके सूरज आसमान में 


परंतु, मैं पूछी अकस्मात

फिर क्यों कोसता मुझे समाज

माँ ने कहा,उन्हें दूसरों को कम आकना आता

जिसका एक ही है इलाज


मैं जिज्ञासु हो पूछी

क्या है इलाज का नाम 

माँ ने कहा की 

लक्ष्मी बाई और कल्पना जैसा करो काम 


मैं सोच में पड़ गयी की मैं सौभाग्यसाली क्योंकि 

मैं लड़की या मुझे मिली ऐसी माँ

शायद से दोनो ही 

मेरे दिल ने कहा 

          ~ आद्या प्रभात