रब से तेरी फरियाद करते है।
बस तुझे ही याद करते है।
तुझे भूलने के वादें भी खुद से हर बार करते है।
तुमसे बातें, तुम्हारा जिक्र, हजार करते है।
तुम्हारी फ़िक्र यादों के सहारे करते है।
इश्क की नाव फंसी है बीच मझधार में, चलो अब किनारे करते है।
अब के तुमसे मिलेंगे ख्वाबों में, ये वादे करते है। ✍️ आदित्य 'आदि'


