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कम्बख्त


आदिब को यूँ दीवाना बना गयीजाते जाते जो वो शायरी सुना गयी

गोते खा रहे थे तनहाई के समंदर मेंकम्बख्त इश्क़ का जज़ीरा दिखा गयी

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