सावन की वो आखिरी रात थी काले घने बादल आकाश में शायद होने वाली बरसात थी आज सोचा था उन्होंने, कि अब सब सच बोल देंगे फैसला जो भी चाहे हो ,पर दिल का भेद खोल देंगे क्या पया फिर मुलाकात हो न हो क्या पता फिर ये बात हो न हो उन्हें पूरा यकीन था कि सब कुछ सही होगा वह ठुकरा देगी ऐसा कुछ नहीं होगा पर फिर आज वे घबरा गए बस खामोशी अपनी फरमा गए न हाल पुछा न चाल पुछा और 'शर्मा जी' शर्मा गए