चारों ओर भय भयंकर

अन्धेरा सूरज को बुलाए धमकर

रोशनी का तो मरना तय

जीवन की आज बिगड़ी लय ।

शब्द शूल से तीखे आज

खुले सब छुपाए राज

अजब सन्नाटा गजब विस्मय

जीवन की आज बिगड़ी लय ।

गीतों में तुकबन्दी नहीं 

दिलों की रजामन्दी नहीं

प्रेम गीतों पर संशय 

जीवन की आज बिगड़ी लय।

लड़ाई करनी है निश्चित 

बचे न कुछ भी किञ्चित्

सबने कर लिया निश्चय 

जीवन की आज बिगड़ी लय । 

 

पथ से अभी फिरो नहीं

ठोकर खाकर  गिरो नहीं

संभलो सैनिक बड़ो अभय

जीवन की फिर बदलो लय।

प्राची में देखो आदित्य 

पुनः पढो जीवन साहित्य 

करो मन फिर ज्योतिर्मय 

जीवन की फिर बदलो लय ।