गंगा को मेरा बचपन मानो, चेनाब मेरी जवानी है नसों मे मेरे यमुना दौड़े, सतलुज मेरी रवानी है पहाड़ों से मुझे धर्म मिला, मैदानों ने दी काया है सरसों के खेतों मे पला बड़ा, देवदारों ने की छाया है गढ़वाली मेरी माँ पावन, पंजाबी को मासी कहता हूँ बदरीनाथ की उपज हूँ मैं, हरिमन्दिर साहब में रहता हूँ देवभूमि से दूर कहीं , वेदभूमि में मैं आया हूँ गढ़वाली माँ का पुत्र लाडला, मासी को भी भाया हूँ