थोड़ा इन्तजार और कर
जब दर्द इतना सह लिया ।
एक दो घड़ी और देख,
जब साल इतना रह लिया ।
भीषण तेरी प्यास बुझाने,
ताप तावन आने वाला है।
रे! रे! चातक धीर धर ,
तेरा सावन आने वाला है ।
रे! रे! चातक धीर धर .....
सजालो फिर से टुटे झूले
बुलालो उन्हें जो राह हैं भूले
सबके दुःख दूर होगें ,
रुत् पावन आने वाला है ।
रे!रे! चातक धीर धर ,
तेरा सावन आने वाला है ।
रे!रे! चातक धीर धर ........