हाथ में खाने का डब्बा

कंधे पर बस्ता

मन में उत्साह लिए


मुस्कुराता

मित्रों संग इठलाता

अरिजीत का नया गीत गुनगुनाता

आठ साल का एक छोटा बच्चा

सुबह-सुबह पहुंचा अपनी कक्षा


गुड मॉर्निंग टीचर

एक ही स्वर में, बच्चे बोले

आज हम गणित पढ़ेंगे

अपनी-अपनी पुस्तक खोलें


किसको याद है पिछला पाठ

तुम, हाँ तुम - इधर आओ

यहाँ सामने आकर

पहाड़ा सुनाओ


बच्चा सकुचाकर आगे आया

फिर धीरे से बुदबुदाया

फाइव वनजा फाइव

फाइव टूजा टेन

फाइव थ्रीजा

फाइव थ्रीजा


बच्चा घबराया

टीचर गुर्रायी

ऐसे ही होते हैं

तुम जैसे लोग

किसी काम के नहीं

केवल देश पर बोझ


आओ

इस निट्ठले को

सबक सिखलाये

नियमों का पाठ पढ़ाएं


मारो इसके गालों पर

तुम सब एक तमाचा

सिखाएं इसे आज

अनुशाशन की भाषा


एक-एक कर लगते रहे

कोमल गालों पर थप्पड़

भयभीत खड़ा रहा

बच्चा सुबक-सुबक कर


और ज़ोर से मारो


इन लोगों को

कुछ समझ ही नहीं आता

जब तक न लगे

एक क़रारा तमाचा


बह निकले पीड़ित आँखों से

तिरस्कार के गीले-गर्म आंसू

बच्चा अब लड़खड़या

दर्द और न सह पाया


गिर पड़ा क्षिथिल

वह धरती पर

देख रहे उसे

सब एकटक


वह देखो

जात-धर्म घृणा के विषैले सर्प ने


आज फिर डसा

एक निरीह को


वह देखो

अहंकार,असहिष्णुता के नुकीले खंजर से


आज फिर हुई

लहू-लुहान मानवता