कबसे करते आये सब मन की बात
आओ आज करें किसी तन की बात
जो हस्पताल के बाहर हताश
बौखलाया कतारों में खड़ा
आओ करें पीड़ित उस तन की बात
जो क्षण क्षण साँसों को तरसा
फिर हारा और दम तोड़ गया
आओ करें लाचार उस तन की बात
जीवित, जो पा न सका कहीं उपचार की शैया
न ही पा सका ,आदर सहित, चिता मरण में
आओ करें अभागे उस तन की बात
जो करने गया पुण्य सहित पावन स्नान
और बन बैठा कितनो की मृत्यु का भागी
आओ करें भ्रमित उस तन की बात
जो दर दर भटका, रोया, गिड़गिड़ाया
फिर भी बचा न पाया अपनों के प्राण
आओ करें विवश उस तन की बात
जो थे किसी के प्रिय, आंखों के तारे, सहारे
शव बन पड़े हस्पताल में, गाडी में, पथ पर
आओ करें दुखित उस तन की बात
जो दिन रात रोग, दर्द अश्रु से घिरा
कर रहा सेवा, हर रहा पीड़ा, बचा रहा प्राण
आओ करें निस्वार्थ उस तन की बात
आओ आज करें किसी तन की बात
आओ करें सवा सौ करोड़ तन की बात
हर एक तन में बस रहे जीवन की बात
आपदा से त्रस्त, झूझते हर जन की बात
आज यही है, तेरे, मेरे, सबके मन की बात!


