नवदुर्गा नवरात्रि's image
535K

नवदुर्गा नवरात्रि

पर्वत सी अड़ जाती

जब आती अपनी हठ पर

कभी अडिग शैलपुत्री हूँ मैं

 

सूर्य सम ज्वाला तप की

प्रज्वलित मेरी साँसों में

कभी तपस्विनी ब्रह्मचारिणी हूँ मैं

 

नेत्र चंचल, शीतल शशि मुखड़ा

माँ कहती मैं चाँद का टुकड़ा

कभी चंद्रघंटा मनोहारी हूँ मैं

 

सुख-समृद्धि, करुणा अपार

मैं ही रचती अपना संसार

कभी कूष्मांडा शुभदायी हूँ मैं

 

विपदा जब भी आन पड़ी

संतान समक्ष मैं ढाल बनी

कभी स्कंदमाता सी माई हूँ मैं

 

मात-पिता ईश मेरे

घर-संसार

Tag: poetry और3 अन्य
Read More! Earn More! Learn More!