चलो मिलें आज
एक अलग भाव से
धर्म से न जात से
नाम से न वास से
चलो मिलें आज
एक अलग भाव से
मिल रहा हो जैसे
मनुष्य से मनुष्य, सदभाव से
चलो देखें आज
एक अलग दृश्य को
रूप को न रंग को
वस्त्र को न अंग को
चलो देखें आज
एक अलग दृश्य को
हो धुंधले आवरण सभी
आत्मा से आत्मा, सदृश्य हो
चलो करें आज
एक अलग बात
धन की न स्वार्थ की
जीत की न हार की
चलो करें आज
एक अलग बात
जो भेद कर आडम्बर सभी
पहुंचे ह्रदय से ह्रदय के पास
मन में रख संवेदना
हिये को कर निस्वार्थ
भावना ले कर सरल,
चलो पूछें किसी से आज
कैसे हो तुम!
क्यों शिथिल है तुम्हारी मुस्कान
क्या आ सकता हूँ, मैं
तुम्हारे किसी काम !
सुनो, न घभराओ,
मैं भी तुम सा ही हूँ - एक इंसान!


