यूँ तो उस सुबह भी
हर रोज़ की तरह उठा था मैं
कहने को तो सूरज की उन झिलमिलाती किरणों से
हर दिन की तरह मिला था मैं,
आँखों से दिखने वाला हर नज़ारा
मानो बिल्कुल अनछुआ था
पर शायद मेरे दिल के अंदर
कुछ ना कुछ तो ज़रूर हुआ था,
कुछ ऐसा महसूस हुआ उस दिन
जो कभी उससे पहले लगा नहीं
एक ही चेहरा था नज़रों में
कोई दूजा चेहरा दिखा नहीं,
यूँ तो चल रहीं थी हवाएं उस वक़्त भी
पर लगता था जैसे कोई नयी बात है उनमें
जब भी कोई हवा का झोंका मुझे छूकर गुज़रा
लगता था कि किसी का प्यारा सा एहसास है उनमें,
एक भीनी-भीनी सी खुशबु
मौजूद थी उस दिन पवन में
पंछी...सूरज... बादल...
कुछ ज्यादा खुशनुमा थे नील गगन में,
कई दफा रोकने के बावजूद
दिल हसीन से नग़मे गाये जा रहा था
बार-बार सिर्फ उसका ख्याल
दिल-ओ-दिमाग पे छाये जा रहा था,
ऐसे तो उस दिन भी
कई आँखों से आँखें हुई थी चार
पर लगता था जैसे सिर्फ वो हसीन आँखें ही
सामने होती थी हर बार,
ना जाने कितने चेहरे देखते-देखते
वो दिन भी गुज़र गया था
लेकिन पहली बार एक चेहरा
आँखों के सामने ठहर गया था,
सूरज की रोशनी तो थी हमेशा की तरह
पर चाँद की चांदनी बड़ी दिलकश थी
देखा चाँद की ओर तो पाया कि
चाँद में भी एक अजीब सी कशिश थी,
यूँ तो याद हो गया था क़दमो को घर तक का रास्ता
पर उस दिन क़दम खुद-ब-खुद कही और चलने लगे
शायद फिर तलाश थी उस चेहरे की
जिसे देखकर ना जाने दिल में कितने अरमान पलने लगे,
ढूँढा तो बहुत...
पर वो चेहरा तो नहीं मिला
फिर बात हुई एक अरसे बाद अपने दिल से
और दूर हो गया हर शिकवा गिला,
पूछा दिल-ए-नादान से मैंने
'क्यों है बेचैन इतना
क्या तुझे मेरे यार हो गया'
कहा मेरे दिल ने मुझसे
'हुआ तो मेरे साथ भी ऐसा पहली ही बार है
पर लगता है कि
शायद तुझे प्यार हो गया',
फिर शर्माते हुए कहा मैंने
'हट पगले
जब प्यार होता है
तो क्या ऐसा होता है'
फिर वो इठलाते हुए बोला
'हाँ मेरे यार
जैसा तेरे साथ हो रहा है
बिल्कुल वैसा ही होता है'
बस फिर क्या था
अपना दिल भी प्रेम रोग का शिकार हो गया
और लोग कहने लगे
लो... इसे भी प्यार हो गया,
मेरी यादों में हर पल
सोचा की आज नहीं मिल सके तो क्या हुआ
हम ज़रूर मिलेंगे कल,
बस यही सोचते हुए
उस रात मैं सो गया
और उसके मखमली खूबसूरत
हसीन से ख़्वाबों में खो गया..!
