फिरसे सपने संवारे जो तुम भी आओ,
अपनी गलती सुधारे जो तुम भी आओ,
दीप उर के महल में जलेंगे प्रिये,
आज सरयू किनारे जो तुम भी आओ।
आया फागुन का मेला के तुम भी आओ,
दिल का ही है झमेला के तुम भी आओ,
साथ किस्से कहानी करेंगे सनम,
छत पे मैं हूं अकेला के तुम भी आओ।


