बारिश और तुम,
एक जैसी हो;
चूंकि बारिश में भीगना,
और तुमसे रीझना;
दोनों एक जैसे लगते हैं!
बारिश के इंतजार में बंजर जमीन,
और तुम्हारे इंतजार में मैं;
दोनों एक जैसे लगते हैं!
बारिश के साथ हवा का चलना,
और तुम्हारे साथ तुम्हारी सखियों का मचलना;
दोनों एक जैसे लगते हैं!
बारिश की बूंदों की छपछपाहट,
और तुम्हारी हसी की खिलखिलाहट;
दोनों एक जैसे लगते हैं!
बारिश से पहले बादलों की गड़गड़ाहट,
और तुम्हारे आने से पहले की आहट;
दोनों एक जैसे लगते हैं!
बारिश में पेंड- पौधों का नाचना,
और तुम्हे देखकर मेरा मुस्कुराना;
दोनों एक जैसे लगते हैं!
बारिश की बूंदों का, नदियों से होकर, समन्दर से मिलना;
और तुम्हारी खुशबू का, मेरे खवाबों से होकर, मुझसे मिलना
दोनों एक जैसे लगते हैं!
बारिश का फिर कभी ना होना,
और तुम्हारा फिर कभी ना वापस लौटना;
दोनों एक जैसे लगते हैं!!
- अंकुर वर्मा
