क्या  लिखूं  विशाल  नभ  सा  देश  है मेरा रज  कण  से  छोटी  मेरे  कलम  की  भाषा   तू  फले  फूले  मस्तक  तेरा  सदा  ऊंचा रहे हर जन्म तेरा रहूं यही इस सुक्ष्म की बड़ी अभिलाषा   मांँ भारती का तिरंगा फहरे आकाश के शीर्ष पर  जन गण मन आनंदित हो यही है सबकी प्रत्याशा