*शमा करती रही मिन्नतें,
हवा को अपना काम करना था!
पतंगा अपने सामर्थ्य से लडा़
उसे तो बस शमा पे मरना था
*लड़ गया पतंगा हवा से,
हवा ने उसे बार बार पटका!
पतंगे की जिद्द थी उसे शमा के
यौवन को रौशन करना था!
*हवा से लड़ते मर गया पतंगा
पर मोहब्बत को अमर कर गया!
हवा से लड़ते हुए हो या शमा पे,
पतंगे को इश्क़ में मरना था!
#विवेकशर्मारायगढ़


