जिस द्वार पे दस्तक दी वही झोली फैलाये खड़ा था देने को कोई तैयार नहीं लेने को हर शख्स खड़ा था सच्चाई ईमानदारी अनमोल है सुनते सुनते कान पक गये झुठे और भ्रष्ट सामान बेच गये, इमानदार बाजार में अनबिका पड़ा था।