*हाँ नदी हूँ छोटी नदी हूँ पर किसी समंदर में गिरा नहीं

अपने वजूद को कायम रखा किसी समंदर से मिला नहीं

 

*अंजान है दुनिया मुझसे मेरी किसी को कोई खबर नहीं

सूरज नहीं जुगनू ही सही इसका मुझे कोई गिला नहीं

 

*जमाना बदलता है बदला करे मैं नहीं बदलने वाला 

मुझमें शाख है हरी पत्तीयाँ भी मेरी जड़ें अभी हिली नहीं 

 

*मेरा लक्ष्य है वो कलियाँ जो गुलशन का भविष्य हैं 

मुखातिब हूँ उस कली से जिनमें फुल अभी खिला नहीं

 

*हाँ कई समंदर आते हैं मिलने मुझसे

पर क्या करुँ मेरे पास इतनी बड़ी जगह नहीं 

#विवेकशर्मारायगढ़