*कलम कुछ लिखना चाहती है। विचार बाहर निकलने के लिए बेकरारदिल जरूरतों के बोझ से दबा कराहते हुए चिल्लाया छड यार ।*वो अमीर बाप की सुंदर बेटी ,आँखों में दिख रहा था प्यार, करने को ही था इज़हार-ए-मोहब्बत गरीबी चिल्लाई छड यार। *चहुँ ओर व्याप्त भ्रष्टाचार, औ मेरे क्राँतिकारी विचारपत्नी ने थैला पकड़ाते हुए कहा छड यार ।*ख्वाब तो हैं जो पूरे न हुए,मेरे विवेक ने कहा अगली बार।कहाँ मानता है मन,मन को समझाया और कहा छड यार। #विवेकशर्मारायगढ़ G20