हे प्रभु!! ये चश्मे कमाल हैं इनमें दिखता बेमिसाल है दिखता वही जो देखना चाहो देखो वही जो देखना चाहो।  सच वही जो दिख जाये    उसे समझ नहीं आया  की आज अचानक  इतनी हमदर्दी क्यों,  फिर पीछे दिखा एक शख्स  मोबाइल लिये, विडियो बन रहा था शायद  मुस्कराते हुये वह आगे बढ़ लिया  अच्छाई का सबूत इकट्ठा किया जा रहा था बिना सबूत कोई यकीन भी तो नहीं करता ।   अरे.... ये चश्मा मिलता कहाँ है?  भाई ये चश्मा खरीदने से नहीं मिलता  कमाना पड़ता है भाई....  हर पांच साल में चुनाव होता है  उसके बाद मिलता है ये चश्मा..  वो भी जीतने पर...  और जीतोगे तभी जब टिकट मिले..  क्या क्या पापड़ बेलने पड़ते हैं  तब कहीं जा के टिकट मिलता है    फिर चुनाव आ रा है  फिर वही टिकट की मारा मारी  फिर से चश्मा उतार कर घुमना होगा  वो सब देखना होगा जो सच में है  बहुत परेशानी है... जनता को बेवकूफ़ बनाना इतना भी आसान नहीं है.....  वो बने तब जाकर मिलेगा वो चश्मा...    हे प्रभु!! ये चश्मे कमाल हैं इनमें दिखता बेमिसाल है दिखता वही जो देखना चाहो देखो वही जो देखना चाहो।  सच वही जो दिख जाये ।