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विजय रथ


बढ़ता हुवा विजय रथ मेरासंघर्ष का हर घड़ी पथ मेराजीवन एक भीषण युद्ध हैसफर हर पल अद्भुत मेरा

दिल को डर नही कभी हार सेभय नही किसी भी ललकार सेनिश्चित है मिलना मेहनत का फलचलता हूँ मैं अपनी रफ्तार से

— विनोद गणेशपुरे
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