याद इतना तुम करोगे पर बताया भी न जाए
प्यार इतना तुम करोगे पर जताया भी न जाए

दिल भरेगा साँस अपना बोझ ही यूँ तो लगेगा
पर किसी को भी कभी यूँ बस सताया भी न जाए

रोज आना फिर चले जाना सफऱ जारी रहेगा
बेवजह तो यूँ किसी को पर बुलाया भी न जाए

आज तुम अख़बार को जब भी पढो तो भूल जाना
इक जहर यूँ शहर में ये सब मिलाया भी न जाए
-विनोद गणेशपुरे