न ख़त्म होंगें कभी
ये टेढ़े मेढे रास्ते
सभी भाग़ रहे हैं
जिंदगी के वास्ते

बुंद बुंद सी शहद है ख़ुशी
समदंर सा हैं गम
चखते चल हर लम्हा
तू हसले खुद के वास्ते

तेरी कहानियाँ
न दौरायेगा कोई
न सोच ज्यादा तू
कल के वास्ते

गुज़ार जिंदगी तू
हवाओ के संग
न बचा यहाँ कोई
रंग तेरे वास्ते

हज्म कर लेे तू
दर्द ये सभी
क्या बचा यहाँ
दोस्त तेरे वास्ते

बहुत कड़ी धूप हैं
गरीबी की यहाँ
छाव सिर्फ़ हैं
अमीरोंके वास्ते

©Vinod Ganeshpure