शिव जगत के परम तत्व भी
शिव ही तो इक निरंकार हैं
शिव धरे है अहम इस तरह
मौन शिव का अलंकार हैं
क्रोध शिव ने पिया है सभी
यूँ हला हल नमस्कार है
चंद्र को सिर पे रख जो दिया
शिव तिरा रूप अंधकार है
शेष को जब लगा कर गले
विष बना नित्य जयकार है
नंदी को प्रेम ऐसा दिया
भक्त शिव सत्य स्वीकार है
-विनोद गणेशपुरे
-विनोद गणेशपुरे

